नई दिल्ली | ब्रेकिंग न्यूज़ – आज सुबह जैसे ही सुप्रीम कोर्ट का EPF वेज सीलिंग से जुड़ा ऑर्डर सामने आया, देश भर के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के फोन बजने लगे। किसी ने HR को कॉल किया, किसी ने अकाउंटेंट को, तो किसी ने सीधे अपने बैंक ऐप में PF बैलेंस चेक करना शुरू कर दिया।
कारण साफ था – सुप्रीम कोर्ट ने EPF वेज लिमिट को लेकर वो फैसला दिया है, जिससे आपकी हर महीने की सैलरी, PF कटौती और भविष्य में मिलने वाली पेंशन तीनों पर असर पड़ने वाला है।
क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने – सीधे शब्दों में
कोर्ट ने कहा है कि अब EPF योगदान केवल 15,000 रुपये की बेसिक सैलरी पर सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अगर कर्मचारी की वास्तविक बेसिक सैलरी इससे ज्यादा है तो PF उसी पर कटेगा। यानी अब PF कैलकुलेशन “सीलिंग” से नहीं बल्कि “असल वेतन” से होगा।
मतलब अगर आपकी बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है तो PF 30,000 पर कटेगा, न कि 15,000 पर।
ये फैसला कागज पर भले ही छोटा लगे, लेकिन जमीन पर इसका असर करोड़ों घरों की EMI, खर्च और रिटायरमेंट प्लानिंग पर पड़ने वाला है।
नया PF कैलकुलेशन कैसे होगा – एक साफ टेबल में समझिए
| बेसिक सैलरी | पुराना PF (₹15,000 पर) | नया PF (असल बेसिक पर) | महीने का फर्क |
|---|---|---|---|
| ₹15,000 | ₹1,800 | ₹1,800 | ₹0 |
| ₹25,000 | ₹1,800 | ₹3,000 | ₹1,200 ज्यादा |
| ₹40,000 | ₹1,800 | ₹4,800 | ₹3,000 ज्यादा |
| ₹60,000 | ₹1,800 | ₹7,200 | ₹5,400 ज्यादा |
अब आप खुद सोचिए – आपकी सैलरी स्लिप में हर महीने कितना पैसा कम दिखेगा।
सरकार और EPFO की प्रतिक्रिया
EPFO अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का आदेश “रिटायरमेंट सुरक्षा बढ़ाने के लिए” है। उनका तर्क है कि आज लोग कम PF जमा कर रहे थे, जिससे बुढ़ापे में पेंशन बहुत कम बन रही थी।
एक सीनियर अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया – “आज लोग 50-60 हजार कमा रहे हैं लेकिन PF 15 हजार पर कट रहा था। रिटायरमेंट में उन्हें 5-6 हजार की पेंशन मिलती थी। कोर्ट चाहता है कि बुढ़ापे में कर्मचारी सड़क पर न आए।”
लेकिन आम कर्मचारी क्या सोच रहा है?
दिल्ली के लक्ष्मी नगर में एक अकाउंटेंट अमित कहते हैं – “रिटायरमेंट तो 25 साल बाद आएगा, लेकिन EMI तो इसी महीने भरनी है। सरकार ने आज का बोझ बढ़ा दिया।”
वहीं कुछ लोग फैसले को सही भी बता रहे हैं। जैसे बेंगलुरु के सॉफ्टवेयर इंजीनियर संजय – “मुझे PF बढ़ना अच्छा लग रहा है। मैं खुद सेविंग नहीं कर पाता, ये फोर्स्ड सेविंग है।”
पेंशन (EPS) पर क्या असर पड़ेगा
EPF का एक हिस्सा EPS यानी पेंशन स्कीम में जाता है। जब बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो EPS का योगदान भी बढ़ेगा।
इसका मतलब –
- ज्यादा योगदान
- ज्यादा पेंशन
- रिटायरमेंट में ज्यादा सिक्योरिटी
लेकिन इसका दूसरा पहलू ये है कि अभी आपके हाथ में कम पैसा आएगा।
कंपनियां क्या करने वाली हैं?
HR कंसल्टेंट्स का कहना है कि कई कंपनियां अब CTC स्ट्रक्चर बदलेंगी। कुछ बेसिक कम दिखाएंगी और अलाउंस ज्यादा करेंगी ताकि PF बोझ कम हो।
यानी कागजों पर खेल शुरू होगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ये भी साफ कर दिया है कि नकली स्ट्रक्चर से बचने की कोशिश को गलत माना जाएगा।
क्या आप PF से बाहर निकल सकते हैं?
जिन लोगों की पहली नौकरी EPF के बाहर शुरू हुई थी, उनके पास ऑप्शन होता है। लेकिन जो पहले से EPF में हैं, उनके लिए बाहर निकलना आसान नहीं है।
यानि ज्यादातर नौकरीपेशा अब इस नए नियम के अंदर ही रहेंगे।
2026 से आपकी सैलरी स्लिप कैसे बदलेगी
अब तक जहां PF 1,800 दिखता था, वहां 3,000, 4,000 या 7,000 दिखेगा। नेट इन-हैंड सैलरी घटेगी। टैक्स पर थोड़ा फायदा होगा क्योंकि PF टैक्स फ्री होता है, लेकिन कैश फ्लो पर दबाव बढ़ेगा।
आखिर में सच्चाई क्या है?
ये फैसला ना पूरी तरह अच्छा है, ना पूरी तरह बुरा। ये एक ऐसा फैसला है जो आज की जेब से पैसा निकालकर कल की जिंदगी को सुरक्षित बनाना चाहता है।
जो लोग EMI में दबे हैं, उनके लिए ये झटका है। जो लोग रिटायरमेंट से डरते हैं, उनके लिए ये राहत है।
लेकिन एक बात साफ है – 2026 के बाद आपकी सैलरी स्लिप पहले जैसी नहीं रहने वाली।
ये सिर्फ कानून नहीं है, ये आपकी जिंदगी के हर महीने के बजट को बदलने वाला फैसला है।

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